भाजपा नेता के करीबी कोयला व्यापारी ने आत्महत्या की, सुसाइड नोट में लिखे गए नामों से मचा हड़कंप
बिलासपुर। भाजपा के कद्दावर नेता और बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक के करीबी माने जाने वाले कोयला व्यापारी नरेंद्र कौशिक ने मानसिक तनाव और धोखाधड़ी के चलते जहर खाकर आत्महत्या कर ली। घटना ने कोयला व्यापार और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला❓
नरेंद्र कौशिक तिफरा के रहने वाले थे और पेशे से कोयला व्यापारी थे। वे भाजपा नेता धरमलाल कौशिक के रिश्तेदार और उनके खास माने जाते थे। सूत्रों के अनुसार, नरेंद्र कौशिक का कोयला व्यापार से जुड़े कई व्यापारियों के साथ 70 लाख रुपये का लेन-देन चल रहा था। आरोप है कि कुछ व्यापारियों ने उनके कोयले और लोडर को धोखे से बेचकर पैसे हड़प लिए।
इसके चलते नरेंद्र को कर्ज चुकाने में परेशानी हो रही थी और वह लगातार मानसिक तनाव में थे। उन्होंने इस मामले में सरगांव थाना, मुंगेली एसपी, आईजी और डीजीपी तक शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मृतक ने अपने सुसाइड नोट में तीन लोगों के नाम लिखे हैं, जिन्हें उन्होंने अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने लिखा कि ये लोग उनके पैसे खा गए और उनके साथ धोखाधड़ी की। नरेंद्र ने यह भी बताया कि वे लगातार कर्ज के दबाव और किश्तों की मांग के कारण परेशान थे।
नरेंद्र ने सरगांव में अपनी गाड़ी में बैठकर जहर खा लिया। दोस्तों ने उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचपाई
भाजपा नेता के करीबी होने के बावजूद, नरेंद्र की शिकायतों को स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया। उनकी बार-बार की गई गुहार अनसुनी रह गई, जिसके चलते उन्होंने यह घातक कदम उठाया। कौन है दोषी❓
अब सवाल उठता है कि सुसाइड नोट में जिन लोगों के नाम लिखे गए हैं, क्या उनके खिलाफ कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला रसूखदार लोगों के प्रभाव में दब जाएगा?
मिलेगा न्याय ❓
नरेंद्र कौशिक की आत्महत्या ने न केवल कोयला व्यापार में जारी गड़बड़ियों को उजागर किया है, बल्कि प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर किया है। देखने वाली बात होगी कि उनके परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।
इस मामले ने स्थानीय और राजनीतिक हलकों में सनसनी फैला दी है। अब सभी की नजरें पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।