
विशेष पिछड़ी जनजाति की बेटी आकांक्षा रानी ♥️ अंडर-19 में चमकाएंगी छत्तीसगढ़ का नाम, बीसीसीआई टी20 ट्रॉफी में खेलेंगी! 🌺🌺🌺🍀🍀☘☘
जशपुर, 18 अक्टूबर 2024: भारत में क्रिकेट का जुनून हर कोने में देखा जा सकता है, और अब यह जुनून जशपुर की बेटियों के दिलों में भी धधक रहा है। जिले की आदिवासी बेटियाँ अब सिर्फ राज्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहरा रही हैं। इस प्रेरणादायक कहानी की नायिका हैं आकांक्षा रानी, जो विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय से आती हैं। 🌻🌻🌻
आकांक्षा ने छत्तीसगढ़ की टीम के लिए अंडर-15 बीसीसीआई ट्रॉफी में पहले ही अपनी धाक जमाई थी, और अब वह छत्तीसगढ़ के लिए अंडर-19 बीसीसीआई टी20 ट्रॉफी में खेलेंगी। इस टूर्नामेंट में उन्होंने अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन बनाकर यह साबित कर दिया कि जशपुर की यह बेटी अपने अंदर एक जबरदस्त क्रिकेट प्रतिभा छुपाए हुए है। 🌻🌻🌻
आकांक्षा का संघर्ष और मां का समर्पण: 🌹🌹🌹
आकांक्षा रानी, जो इचकेला स्थित प्री मैट्रिक बालिका छात्रावास की अधीक्षिका पंडरी बाई की बेटी हैं, ने बचपन से ही क्रिकेट में अपनी रुचि दिखाई थी। जब उनकी मां ने बेटी की इस रुचि को पहचाना, तो उन्होंने उसे उच्च स्तरीय कोचिंग दिलाने का निर्णय लिया। आकांक्षा की मां सिर्फ अपनी बेटी के लिए ही नहीं, बल्कि छात्रावास की अन्य आदिवासी बच्चियों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बनीं। 🌻🌻🌻
बालिका छात्रावास में क्रिकेट पिच का निर्माण: 🌹🌹🌹
पंडरी बाई ने न केवल आकांक्षा को आगे बढ़ाया, बल्कि छात्रावास की अन्य बच्चियों के लिए भी एक अभ्यास पिच का निर्माण करवाया। उन्होंने बेटियों के खेल को निखारने के लिए अच्छी क्रिकेट सामग्रियों का प्रबंध किया और अपने बेटी व कोच की मदद से सभी बच्चियों की ट्रेनिंग शुरू करवाई। जल्द ही इस प्रयास का नतीजा सामने आया, जब छात्रावास की 03 अन्य आदिवासी बालिकाओं का चयन अंबिकापुर में आयोजित राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में हुआ। इन बच्चियों ने रजत पदक जीते और राष्ट्रीय अंडर-17 महिला क्रिकेट टीम में स्थान बनाया। 🌻🌻🌻
चयनित खिलाड़ी: 🌹🌹🌹
चयनित बालिकाओं में एंजल लकड़ा, झुमुर तिर्की, और वर्षा बाई का नाम शामिल है। यह सभी बच्चियाँ अब राष्ट्रीय महिला अंडर-17 प्रतियोगिता 2024-25 में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। 🌻🌻🌻
आकांक्षा रानी और उनकी साथी खिलाड़ियों की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और समुदाय के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह दिखाती है कि सही दिशा और अवसर मिलने पर आदिवासी बेटियाँ भी राष्ट्रीय मंच पर चमक सकती हैं। इन बेटियों की यह सफलता न केवल खेल की दुनिया में, बल्कि आदिवासी समाज के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। 🌻🌻🌻

