Mauni Amavasya 2025: जानिए मौनी अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व, पुण्य स्नान के लाभ और शुभ संयोग

मौनी अमावस्या 2025: दुर्लभ योग में महाकुंभ स्नान का पुण्यकाल

प्रयागराज में इस वर्ष महाकुंभ का आयोजन एक दुर्लभ संयोग में हो रहा है, जो 144 वर्षों बाद बन रहा है। खास बात यह है कि इस बार मौनी अमावस्या के दिन स्नान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर संगम में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और कुंडली में मौजूद अशुभ ग्रहों से मुक्ति मिलती है।

मौनी अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व

मौनी अमावस्या में ‘मौन’ का विशेष महत्व होता है। ‘मौनी’ शब्द का अर्थ होता है – मौन रहना। प्राचीन काल में ऋषि-मुनि इस दिन मौन व्रत धारण कर आत्मशुद्धि और ध्यान में लीन रहते थे। यह दिन योग, ध्यान और साधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन मौन रहकर ध्यान करने से भगवान विष्णु और शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

पांच डुबकियों का महत्व

महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान का अत्यधिक महत्व है। इस दिन पांच विशेष डुबकियां लगाने से देवी-देवताओं और पितरों की कृपा प्राप्त होती है:

1. पहली डुबकी: पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्नान करें, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


2. दूसरी डुबकी: कुल देवता और इष्ट देवता की कृपा प्राप्त करने के लिए।


3. तीसरी डुबकी: उत्तर दिशा की ओर मुख करके भगवान शिव, माता पार्वती और सप्त ऋषियों का आशीर्वाद पाने के लिए।


4. चौथी डुबकी: पश्चिम दिशा की ओर मुख करके देवी-देवताओं की कृपा के लिए।


5. पांचवीं डुबकी: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों की आत्मा की शांति के लिए।



दान और पितृ तर्पण का महत्व

मौनी अमावस्या पर दान और तर्पण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन विशेष रूप से तिल, अन्न, वस्त्र, और धन का दान करना शुभ माना जाता है। साथ ही, शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीप जलाने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सिद्धि योग और शिववास योग का दुर्लभ संयोग

इस वर्ष मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी योग, नवपंचम योग, सिद्धि योग और शिववास योग का संयोग बन रहा है। इन शुभ योगों में भगवान शिव और विष्णु की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से, यह संयोग कुछ राशियों के लिए अत्यधिक लाभकारी रहेगा।

कैसे करें मौनी अमावस्या पर पूजा?

सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें।

पूरे दिन मौन व्रत का पालन करें और ध्यान में लीन रहें।

तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।

सूर्यदेव को जल अर्पित करें और ‘ॐ पितृ देवतायै नम:’ मंत्र का 11 बार जाप करें।

शाम को दक्षिण दिशा में दीप जलाएं और पितरों के लिए तर्पण करें।

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